अमेठी/रायबरेली से लौटकर समृद्धि

भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी और रायबरेली में ही घेरने की रणनीति तैयार करने में जुट गयी है। अमेठी व रायबरेली में रूकी हुई लगभग 2500 करोड़ रूपये से अधिक की परियोजनाओं को जल्द से जल्द चालू कर श्रेय लेने के लिए केन्द्र के किसी कद्दावर नेता के रायबरेली आने की उम्मीद जताई जा रही है। लखनऊ में गुरुवार को रायबरेली में एम्स को लेकर मुख्यमंत्री की हुई समीक्षा बैठक के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जिस तरह से बीते तीन साल में रायबरेली व अमेठी की कई परियोजनाओं को या तो धन ही आवंटित नहीं किया गया या फिर उन्हें लावारिस हालत में छोड़ दिया गया और अचानक रायबरेली एम्स को लेकर प्रशासनिक चहलकदमी बढ़ी है। उससे अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी व रायबरेली में घेरने की रणनीति गुपचुप रूप से तैयार की जा रही है।
इस रणनीति में रायबरेली एम्स को प्राथमिकता देने के पीछे छिपे मकसद के बारे में राजनीतिज्ञों का कहना है कि रायबरेली और गोरखपुर में एम्स को एक साथ चालू कर प्रदेश सरकार अमेठी व रायबरेली के साथ सौतेले व्यवहार के आरोप से बरी होना चाह रही है। हालांकि, इसके अलावा लगभग 570 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली ऊंचाहार-अमेठी-सुलतानपुर रेल लाईन, लगभग 462 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली रायबरेली-अकबरगंज रेल लाईन, लगभग 28 करोड़ रूपये लागत के ड्राईवर ट्रेनिंग संस्थान, लगभग 142 करोडृ रुपये की लागत से बनने वाले राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शैक्षणिक संस्थान, लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रेल पहिया कारखाने के लिए धन आंवटन में केन्द्र सरकार की देरी रायबरेली व अमेठी के लोगों के गले नहीं उतर रही है।
स्पाइस पार्क और राजीव गांधी राष्ट्रीय उड़ान विश्वविद्यालय जैसे संस्थान उद्घाटन के लिए इंतजार कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है पिछले तीन साल में जिस तरह से रायबरेली एम्स के लिए रिवाइज स्टीमेट को मंजूरी न देकर सिर्फ उसके आकार में कटौती करने का काम केंन्द्र सरकार ने किया है उसी एम्स को लेकर योगी सरकार की चहलकदमी कुछ न कुछ तो गुल खिलाएगी। भाजपा सूत्रों की मानें तो रायबरेली और अमेठी को लेकर शीर्ष नेतृत्व बेहद गंभीर है। यहां पर रूकी हुई परियोजनाओं को लेकर लोगों में भ्रम भी बना हुआ है ऐसे में एक साथ कई परियोजनाओं के लिए धन देकर लोगों में अच्छा संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। एक भाजपा नेता का मानना है कि अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जुलाई 2018 में एम्स में ओ पी डी सेवा की शुरूआत भाजपा के किसी बड़े नेता के हाथों होगा, उनमें प्रधानमंत्री भी हो सकते हैं।