नई दिल्ली। आगामी आम चुनावों से पहले भले ही केंद्र में सत्ताधारी भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के खिलाफ पूरे देश में विपक्षी दल एकजुट हो रहे हों, लेकिन जनता की कक्षा में फिर भी सबसे ज्यादा नंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए को ही मिलने जा रहे हैं। यह बात दो अलग-अलग सर्वे में सामने आई है, जिनकी रिपोर्ट बृहस्पतिवार को जारी की गई।

हालांकि एबीपी न्यूज-सीवोटर और इंडिया टुडे-कार्वी इनसाइट्स के अलग-अलग सर्वे में यह भी कहा गया है कि सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने के बावजूद एनडीए इस बार लोकसभा चुनावों में सरकार बनाने के लिए पर्यापत बहुमत से दूर रह सकता है। सर्वे में सामने आया है कि किसी भी गठबंधन को इन आम चुनावों में पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा, जिसके चलते एनडीए को दूसरी बार सरकार बनाने के लिए क्षेत्रीय दलों से समर्थन मांगना पड़ सकता है।

दोनों ही सर्वे के मुताबिक, 2014 में दशकों बाद भारी बहुमत हासिल कर सरकार गठित करने वाले नरेंद्र मोदी को नौकरियों की कमी और कमजोर कृषि अर्थव्यवस्था के चलते मई में संभावित लोकसभा चुनावों में जनता की उपेक्षा का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बृहस्पतिवार को सर्वे में इस बार पूर्वोत्तर भारत में भाजपा की सीटें बढ़ने की संभावना जताई गई है।

दोनों ही सर्वे में बृहस्पतिवार को देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को मतदाताओं का विरोध सहने के लिए तैयार रहने का आकलन दिया गया है। सर्वे का अनुमान है कि पिछले चुनाव में यूपी की 80 में से 73 लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा इस बार 25 तक सिमट सकती है। इसके लिए मुस्लिम मतों को आकर्षित करने वाली एक पार्टी का बहुसंख्यक मतों वाले हिंदू दलितों पर पकड़ रखने वाली दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन को जिम्मेदार बताया गया है। ऐसा ही आकलन बुधवार को भी एक अन्य सर्वे में दिया गया था।