नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में तीन दिवसीय 8 ,9 और 10 जनवरी तक सिम्फनी ( सांस्कृतिक कार्यक्रम ) का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम का विषय ( गो कैच ए रेनबो ) यानी इंद्र धनुष रहा। जिसका अर्थ है , जिस तरह इंद्र धनुष के सात अलग रंग होने के बाद भी एक साथ है उसी प्रकार हम सभी को समानता से एकजुट होकर एकता के साथ अपनी और अपने भारत देश के साथ कदम से कदम मिला कर चलना हैं।

कार्यक्रम का आरम्भ कॉलेज प्रिंसिपल डॉ स्वाति पाल , और मुख्य अतिथि श्री अनिरुद्ध पाठक ( लेखक व निर्देशक ) , पंडित दीपक महाराज ( कथक डांसर व अध्यापक ) और श्रीमती सामंथा कोच्चर ( एमडी ब्लॉसम कोच्चर ग्रुप ऑफ कॉम्पैन्स ) के हाथों से दीप प्रज्वलित करके किया गया । इस अवसर पर डॉ स्वाति पाल ने सभी अतिथियों समेत , कॉलेज के समस्त सदस्यों का अभिनंदन किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया ।

इस मौके पर कथक डांसर पंडित दीपक महाराज ने सभी का शुक्रिया अदा करते हुए कला को परिभाषित किया । कला का परिचय देते हुए वह एक वाक्य बोलते हैं ” शब्दों का शोर तो तमाशा है , मौन ही नृत्य की परिभाषा हैं ” । मौन होकर ही कला को प्रदर्शित किया जा सकता है । साथ ही उन्होंने राधा कृष्ण का भाव भी प्रकट किया ।उन्होंने पदम विभूषण अपने पिता बिरजू महाराज को याद करते हुए कहा , कि उनके ही दिखाय रास्तों पर आज सांस्कृतिक कथक नृत्य कला के विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं ।

जिसके बाद गेस्ट ऑफ ऑनर श्री अनिरुद्ध पाठक ने अपने स्टार प्लस पर आने वाले धारावाहिक सिया के राम को लेकर अपना अनुभव साझा किया और रामायण का चुनाव करने का अपना उद्देश्य भी बताया कि हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला होती हैं उसी प्रकार राम का जीवन तो सदा आज्ञा का पालन करने में लगा रहा । लेकिन सिया ने हमेशा अपना निर्णय स्वयं लिया । चाहे वह राम के साथ वनवास जाना हो या फिर लक्षमण रेखा का पार करना । जिसके बाद सामंथा कोच्चर ने अपना जीवन का परिचय देते हुए छात्राओं से कहां की हर किसी को वहीं कार्य चुनना चाहिए जिसमें वह निपुण हो । इसके बाद रंगा रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ।