नई दिल्ली / टीम डिजिटल। आखिर पचहतर दिन के बाद और सारी माथा पच्ची के बावजूद कांग्रेस नेहरू गांधी से मुक्त नहीं हो सकी । राहुल गांधी ने उन्नीस माह बाद लोकसभा चुनाव की पराजय को देख कर इस्तीफा दे दिया । फिर सबके मनाने के बावजूद नहीं माना । कांग्रेस बेलगाम और कमजोर होती चली गयी । विधायक और सांसद पार्टी छोड छोड कर जाने लगे तब चिंता सताई । आखिर कार कल नया प्रधान मिल गया । वही श्रीमती सोनिया गांधी । बेटे ने छोडा । मां ने पकडा । या मां को पकडा । बीच में ऐसे भी लगा जैसे प्रियंका गांधी भी प्रधान बनने वाली हैं । शशि थरूर और कैप्टन अमरेंद्र सिंह।ने नाम उछाला जरूर लेकिन आगे नहीं बढ पाया । आखिर सोनिया गांधी को ही कमान सौंप कर कांग्रेसी निश्चिंत हो गये ।
बहुत चर्चा और मंथन के बाद कल जाकर नाम तय हुआ और रास्ता दिखाया चिदम्बरम् ने । इस तरह मामला सुलझ गया । कांग्रेस को आने वाले विधानसभा चुनाव में अब सोनिया गांधी की रहनुमाई में उतरना है । इससे पहले अट्ठारह अगस्त को भी देखना है । परिवर्तन रैली में कोई बडा फैसला न ले लें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा । वैसे बीरेंद्र सिंह कह रहे हैं कि यदि हुड्डा सिर्फ रैली करते हैं तो यह बडा धमाका नहीं लेकिन यदि वे कांग्रेस छोडने की घोषणा करते हैं तो यह बडा धमाका होगा । दूसरी ओर दुष्यंत चौटाला का मानना है कि हुड्डा में कांग्रेस छोडने का दम नहीं । देखो । ये उकसाने के तरीके हैं । उकसाने के लिए बयान दिए जा रहे हैं । सीनिया गांधी इस लम्बित मामले को कैसे हैंडल करेंगी यह देखना है । क्योंकि हुड्डा समर्थक अशोक तंवर की अध्यक्ष पद से छुट्टी पर अडे हुए हैं ।

कमलेश भारतीय, वरिष्ठ  पत्रकार