नई दिल्ली। दिल्ली सरकार 700 लीटर प्रति मुफ्त पानी देती है,लेकिन दिल्ली के अधिकतर इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई एक आम बात है, इसलिए दिल्ली वासीयो को जल बोर्ड के पानी को RO या फिल्टर कर ही पीना पड़ता है, इस प्रक्रिया में प्रत्येक परिवार को प्रति माह निश्चित राशि खर्च करनी पढ़ती है, इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से दिल्ली के लोग पानी का भारी भरकम बिल हर महीने भर रहे हैं।
स्वराज इंडिया दिल्ली के प्रदेश महासचिव नवनीत तिवारी के अनुसार दिल्ली सरकार की असफलता के कारण दिल्ली के अधिकतर इलाकों प्रत्येक परिवार पीने के पानी पर हर महीने बड़ी राशि खर्च करता है।फिर दिल्ली सरकार मुफ्त पानी का दावा कैसे करती है?

दूषित व गंदे पानी के आपूर्ति के कारण दिल्ली में डायरिया, पीलिया और हेपटाइटिस जैसी बिमारियां बढ़ी हैं। पिछ्ले चार सालों मे लगभग 22 लाख दस्त (Diarrhoea) के केस, 19 हज़ार हैजा(Cholera) के केस, और 36 हज़ार पानी से जुड़ी बीमारी की शिकायतें दिल्ली की अस्पतालों मे दर्ज की गई है।

दिल्ली के कई इलाकों में जल बोर्ड के पाइपलाइन ना होने या पानी सप्लाई कम होने के कारण दिल्ली में लाखों परिवार आज भी बोतलबंद पानी खरीद कर पीने को मजबूर हैं।
कई इलाकों में प्राइवेट वॉटर प्लांट और टैंकर माफिया सक्रिय हैं, जो स्थानीय नेताओं व प्रशासन की मिलीभगत से भूमिगत जल का अवैध दोहन कर पानी का कारोबार कर रहे हैं। एक तरफ ऐसे पानी की गुणवत्ता की कोई जांच नहीं होती दूसरी तरफ दिल्ली में भूमिगत पानी का स्तर लगातार तेज़ी से नीचे गिर रहा है।

नीति अयोग के 2018 के रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक दिल्ली मे पानी का घोर संकट आ सकता है। इसके मुताबिक दिल्ली मे 82 फीसदी घरों मे पाइपलाइन द्वारा नल के पानी का प्रब 25 हज़ार घरों मे यह सुविधा नहीं है।

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष कर्नल जयवीर के अनुसार दिल्ली में पानी की विकराल समस्या को लेकर स्वराज इंडिया कई विधानसभाओं में ‘जल-स्वराज मुहिम’ चलाती रही है। मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पास एकमात्र कार्यभार जल-मंत्रालय का ही है, लेकिन फिर भी दिल्ली के लोगों को साफ पानी पहुंचाने में वो पूरी तरह फ़ेल साबित हुए हैं।
स्वराज इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष अजित झा के अनुसार पानी जैसे महतवपूर्ण विषय पर सरकार के पास दीर्घकालिक नीति का अभाव है। 2015 क्योंकि दिल्ली की ड्राफ्ट जल नीति जो पूर्व मुख्यमंत्रि शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान आई थी, अब तक पेंडिंग है। दिल्ली ग्राउंड वॉटर बिल भी 2010 से पेंडिंग है,इस कारण बड़ी मात्रा में ग्राउंड वॉटर का दोहन जारी है।

दिल्ली प्रदेश महासचिव नवनीत तिवारी कहते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री,मंत्री व विधायक खुद मिनरल वॉटर पीते हैं, जबकि आम लोगों को दिल्ली जल बोर्ड का दूषित जहरीला पानी पीने को दे रहे हैं। साफ पीने का पानी सभी नागरिकों का अधिकार है, जो सरकार पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नही करवा सकती, उसे सत्ता में कोई रहने का कोई हक नही है।