नई दिल्ली। साठ वर्षीय राम गोपाल शर्मा के पास दिन भर सैंकड़ों फोन आते हैं, सबकी अपनी उम्मीदें होती है कि यहां से निराशा नहीं मिलेगी, रक्तदान के लिए हर संभव तत्पर राम गोपाल कोविड काल में लोगों के लिए मसीहा बन गए। प्लाज्मा डोनेट करना हो या फिर होल ब्लड, एक बार किसी ने कॉल किया तो उसे मदद जरूर मिलती है। शाहबाद मारकंडा, जिला कुरूक्षेत्र, हरियाणा के रहने वाले राम गोपाल शर्मा अब तक 185 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं।

वर्ष 1978 में जब उन्होंने पहली बार ब्लड डोनेट किया था तो उस समय स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर लोगों के बीच इतनी जागरूकता नहीं थी। शहर के एक निजी अस्पताल में काम करते हुए उन्होंने इस दर्द को महसूस किया कि इलाज के लिए आने वाले लोग कितने मजबूर होते हैं, इसलिए उनसे जो बन पड़ा उन्होंने मदद करने की ठानी। बंसल अस्पताल कुरूक्षेत्र में काम करते हुए रक्तदान के लिए उनके चर्चे चारों ओर होने लगे। राम गोपाल शर्मा कहते हैं कि 18 वर्ष की उम्र में उन्होने पहली बार रक्तदान किया, इसके बाद जरूरत पड़ने पर कभी पीछे नहीं हटे।

समाजसेवा के इसी जज्बे की वजह से कुछ ही सालों बाद उन्होंने बेसहारा बुजुर्गो की सेवा के लिए एक आश्रम भी शुरू किया। इसके साथ ही नराती देवी ब्लड बैंक में भी सक्रिय भूमिका अदा करते रहे, राम गोपाल शर्मा कहते हैं कि किसी भी सहायता करने के लिए केवल दिल से इच्छा होनी चाहिए, ईश्वर सभी रास्ते खोल देता है। अब कई जगह ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित होने लगे, कोविड काल में भी आप कई यूनिट रक्तदान चुके हैं। कोविड के गंभीर काल में ऐसे योद्धाओं को सलाम।