नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस पर हजारों स्थानों पर यज्ञ किया गया। कोरोना संकट के चलते इस बार यह यज्ञ अधिकांश लोगों ने अपने-अपने घरों में ही किया। इस अवसर पर आज प्रात:काल अपने घर ही सपत्नीक किए गए यज्ञ के उपरांत श्रद्धालुओं को ऑन लाइन संबोधित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ने कहा कि यज्ञ की महिमा हमारे सभी धर्म शास्त्रों में गाई गई है। वेदों में यज्ञ को विश्व का सर्वोत्तम कर्म बताया है। यह ना सिर्फ एक धार्मिक कर्मकांड है अपितु, इससे पर्यावरण शुद्धि, आध्यात्मिक ऊर्जा का जागरण व उत्थान तथा रोग निवारण, उत्तम कृषि व वर्षा जैसे विषय भी सीधे-सीधे जुड़े हैं। कोरोना जैसे वैश्विक संकट से मुक्ति में भी औषधियुक्त सामग्री से दैनिक हवन बहुत लाभकारी है।

दर्शनाचार्या श्रीमती विमलेश बंसल आर्या ने उन विशेष मंत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व कोरोना के आतंक से त्राहि-त्राहि कर रहा है। इससे मुक्ति हेतु विश्व भर के वैज्ञानिक, चिकित्सक, विशेषज्ञ तथा सरकारें जूझ रही हैं। ऐसे में हमारा भी कुछ धर्म बनता है कि श्वसन सम्बन्धी रोगों से मुक्ति, वायुमंडल की शुद्धि व विश्वभर के प्राणियों के उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति हेतु अथर्ववेद के द्वितीय कांड के 31 और 32 वें सूक्त के विशेष मंत्रों के साथ विशेष औषधिय हवन सामग्री द्वारा नित्य-नैमित्तिक वृहद यज्ञ करें और कराए। सामिग्री में देशी गाय का स्वर्णमायी घी, आम या पीपल द्वारा छोड़ी गई समिधा के साथ चार प्रकार के द्रव्य: सुगंधित – इलायची, अगर, तगर मिष्ट – गुड़, शक्कर पुष्ट – काजू, किशमिश, मुनकके, बादाम अखरोट इत्यादि मेवे और औषधीय – गुग्गुल, लोबान, वचा, नागर मोथा, वाय-बिडंग, राई, सरसों, नारियल, जटामासी, तिल, नीम के पत्ते आदि औषधियों का प्रयोग इन दिनों विशेष उपयोगी है।

श्री बंसल ने यह भी कहा कि जो लोग यज्ञ(हवन) का विधि विधान नहीं जानते उनके लिए भी हमने वैदिक हवन सिखाने की नि:शुल्क व्यवस्था ऑन-लाइन की है। जो लोग अपने यहाँ हवन कराना चाहें या सीखना चाहें वे हमसे संपर्क कर सकते हैं। उन्हें हवन से संबंधित सभी जानकारी घर बैठे ही दी जाएगी। वे एक सप्ताह में ही स्वयं अपने घर में बैठकर आसानी से अपने परिजनों के साथ यज्ञ(हवन) का लाभ ले, अपने आसपास के वातावरण की शुद्ध कर कोरोना से सीधा युद्ध लड़ सकते है।