नई दिल्ली। शैक्षणिक संस्थानों के लिए फ़र्नीचर का निर्माण करने वाली पॉपकॉर्न फ़र्नीचर ने ‘कोविड-19 के बाद स्कूलों को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने’ के विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। डेढ़ घंटे लंबे इस वेबिनार के पैनल के सदस्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता क्षेत्रों की पांच जानी-मानी हस्तियां शामिल थी, जिसके बाद चर्चा में शामिल लोगों को बेहतर जानकारी प्रदान करने के लिए आधे घंटे के सवाल-जवाब सत्र का आयोजन किया गया।

स्कूलों को दोबारा खोले जाने को सुविधाजनक बनाने में शैक्षणिक संस्थानों की मदद के लिए इसकी रूपरेखा और दिशा-निर्देशों पर चर्चा के उद्देश्य से इस सत्र का आयोजन किया गया था। इस सत्र में लॉकडाउन के बाद शिक्षा के मॉड्यूल में हुए बदलाव को शामिल किया गया, साथ ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए नए SOPs के साथ भविष्य में आगे बढ़ने के विषय पर चर्चा की गई। इस वेबिनार में कई स्कूलों के शिक्षकों, प्राचार्यों, स्कूल के मालिकों, स्कूल के ट्रस्टियों, सलाहकारों, छात्रों और मीडिया जगत के लोगों सहित 1000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। पॉपकॉर्न फ़र्नीचर की संस्थापक एवं निदेशक, श्रीमती दीपिका गोयल ने इस वेबिनार की अध्यक्षता की। इस वेबिनार के पैनल के पांच प्रख्यात सदस्यों में पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित जाने-माने शिक्षाविद्, डॉ. श्यामा चोना; पब्लिक हेल्थ फ़ाउंडेशन में हेल्थ प्रमोशन डिवीजन की निदेशक, डॉ. मोनिका अरोड़ा; अपोलो हॉस्पिटल में पीडीऐट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी की वरिष्ठ सलाहकार, डॉ. विद्या गुप्ता; जीडी गोयनका समूह की निदेशक, श्रीमती नुपुर गोयनका; और श्री सुमित नादगीर, सीईओ, हाई-केयर एमडी, ट्रूनॉर्थ शामिल थे।

इस वेबिनार के दौरान कई महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जो इस प्रकार हैं- कोविड-19 के बाद स्कूलों को फिर से खोलने में प्रमुख चुनौतियां और इसका प्रभाव, बच्चों के माता-पिता तथा स्कूल के प्राधिकारियों के बीच परस्पर विश्वास से जुड़ी चुनौतियां, दिव्यांग छात्रों के लिए चुनौतियां या कठिनाइयां, स्वच्छता और सुरक्षा की प्रक्रिया तथा शिक्षा के हाइब्रिड मॉड्यूल को लागू करना। इन विषयों पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए, पैनल के सदस्यों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों तथा छात्रों की सुरक्षा के लिए अपनाने योग्य SOPs पर संक्षेप में अपने विचार व्यक्त किए। वेबिनार में सवाल-जवाब का सत्र थोड़ा लंबा था और इसमें लॉकडाउन के दौरान स्कूली बच्चों, अभिभावकों एवं शिक्षकों के सामने आने वाली वास्तविक और आभासी समस्याओं से जुड़े सवाल उठाए गए। इसके अलावा, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों द्वारा अंतिम रूपरेखा तैयार करने तथा सरकार की ओर से शैक्षणिक संस्थानों को राहत पैकेज दिए जाने पर चर्चा की गई।

पॉपकॉर्न फ़र्नीचर की संस्थापक एवं निदेशक, श्रीमती दीपिका गोयल ने कहा, “एक कंपनी के तौर पर पॉपकॉर्न ने देश-विदेश के 8000 से अधिक स्कूलों में अपने फ़र्नीचरों की बिक्री की है और बच्चों की सुरक्षा हमेशा से हमारी प्राथमिकता रही है। हम स्कूलों के दोबारा खुलने के बाद बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास करना चाहते हैं। इसी विचार के साथ हमने “सुरक्षित रूप से स्कूलों को दोबारा खोलने” के विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया, क्योंकि सही मायने में हमें इस बात का एहसास है कि स्कूलों को फिर से खोले बिना कोई भी समाज पूरी तरह से नहीं खुल सकता है। इसके लिए हमने कुछ विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम किया और स्कूलों को दोबारा खोलने के विषय पर स्वास्थ्य व सुरक्षा से जुड़ी एक नियमावली तैयार की, जो अब हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध है। इस वेबिनार में हज़ारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया यह अनुभव वाकई शानदार था, क्योंकि हम स्कूलों को सुरक्षित रूप से दोबारा खोलने में ज्यादा-से-ज्यादा हितधारकों की मदद करना चाहते थे।”

पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित जाने-माने शिक्षाविद्, डॉ. श्यामा चोना, ने कहा, “मैं अब तक कई वेबिनार में भाग ले चुका हूं, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि यह कई मायनों में अलग था और मेरे लिए यह अब तक का सबसे असाधारण वेबिनार था। पॉपकॉर्न फ़र्नीचर ने शानदार प्रयास किया जिसमें हज़ारों प्रतिभागियों एवं विभिन्न क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियों ने पैनल के सदस्यों के रूप में भाग लिया, और यही बात इस वेबिनार को दूसरों से अलग करती है। पैनल के प्रत्येक सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में विशेषज्ञ थे, जिन्होंने सुरक्षित रूप से स्कूलों को दोबारा खोलने पर काफी शोध किया था। स्कूलों और समाज की मदद के उद्देश्य से ही इस वेबिनार का आयोजन किया गया था।”

जीडी गोयनका समूह की निदेशक, श्रीमती नूपुर गोयनका ने कहा, “स्कूलों को फिर से खोलने का काम सभी प्रमुख हितधारकों, स्कूल मैनेजमेंट, अभिभावकों और छात्रों के आपसी सहयोग और बेहतर तालमेल के बाद ही संभव होगा। विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि “संकट की घड़ी को एक अवसर की तरह देखें और इस समय को व्यर्थ ना गवाएं”। हमारी शिक्षा व्यवस्था में शामिल सभी लोगों के लिए यह संकट एक बड़े अवसर की तरह है। खुद को परिस्थितियों के अनुरूप ढालना, अपने सब्र को बरकरार रखना और सहनशील बने रहना समय की माँग है।”

पब्लिक हेल्थ फ़ाउंडेशन में हेल्थ प्रमोशन डिवीजन की निदेशक, डॉ. मोनिका अरोड़ा, ने कहा, “वेबिनार के पैनल और इस में भाग लेने वाले लोगों में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे, और यह बात मुझे सबसे अच्छी लगी। इस वेबिनार ने स्कूलों को सुरक्षित तरीके से दोबारा खोलने के लिए सभी प्रासंगिक स्रोतों को एकजुट किया, क्योंकि हम सभी बच्चों की सुरक्षा के बारे में समान रूप से चिंतित थे। मैं जानती हूं कि इस मुद्दे से जुड़े सभी हितधारक बहुत सी बातों को लेकर चिंतित हैं, जिसमें पैनल के सदस्यों या स्कूलों द्वारा सुरक्षा से संबंधित चुनौतियां का सामना करने की बात भी शामिल है, और पहले से ही स्कूलों को दोबारा खोलने का प्रयास करने वाले संस्थानों एवं लोगों से बहुत कुछ सीख सकते हैं।”

अपोलो हॉस्पिटल में पीडीऐट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी की वरिष्ठ सलाहकार, डॉ. विद्या गुप्ता ने कहा, “मेरे विचार से यह वेबिनार इस विषय पर अपने नजरिए को व्यवस्थित करने के लिए बेहद अहम था कि, स्कूलों को दोबारा किस प्रकार खोला जाए। इसमें भाग लेने वाले अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने स्कूलों को दोबारा खोलने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर गौर किया, और ऐसा करना सही मायने में एक उत्कृष्ट विकल्प था। मुझे खुशी है कि मुझे भी स्कूलों को फिर से खोलने के बारे में लोगों की चिंताओं और उनकी परेशानियों को दूर करने में योगदान देने का अवसर मिला।”
हाई-केयर एमडी, ट्रूनॉर्थ के सीईओ, श्री सुमित नादगीर ने कहा, “स्कूलों को सुरक्षित तरीके से दोबारा खोलने का विषय बेहद प्रासंगिक था और निश्चित तौर पर यह समय की जरूरत थी। स्कूल चाहे क्रमबद्ध तरीके से या फिर पूरी तरह से दोबारा खोलने पर विचार कर रहे हों, इस वेबिनार से स्कूलों को सुरक्षित तरीके से दोबारा खोलने में मदद करने के लिए हर तरह की जानकारी मिली। यह पैनल वाकई बेहद शानदार क्योंकि इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे, और मुझे यकीन है कि स्वच्छता एवं सुरक्षा से संबंधित इन बेहतर युक्तियों के साथ हम सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित ढंग से पढ़ाई-लिखाई दोबारा शुरुआत की आशा कर सकते हैं।”