2022 तक होगा रेलवे की सिगनल प्रणाली का आधुनिकीकरण


समृद्धि भटनागर

नयी दिल्ली| भारतीय रेलवे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2022 तक नए भारत के संकल्प को पूरा करने के लक्ष्य के साथ संपूर्ण सिगनल प्रणाली को विश्व की आधुनिकतम परिचालन प्रणाली से बदलने का फैसला किया है । रेल मंत्री पीयूष गोयल ने संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि 2020 तक भारतीय रेलवे को पूर्ण रूप से विद्युतीकृत करने के लक्ष्य के साथ यह भी फैसला किया गया है कि 2022 तक रेलवे की संपूर्ण सिगनल प्रणाली को भी बदलकर विश्व की सबसे अाधुनिकतम प्रणाली लगायी जाए। इस बारे में दुनिया में प्रचलित सभी आधुनिक परिचालन प्रणालियों का अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने इस बारे में अधिक ब्योरा नहीं दिया।
उल्लेखनीय है कि विश्व में करीब एक दर्जन आधुनिकतम सिगनल प्रणालियां हैं। लुधियाना-दानकुनी और दादरी-जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर में ऐसी ही आधुनिकतम प्रणाली लगायी जा रही है। गाेयल ने कहा कि नयी सिगनल एवं परिचालन प्रणाली के आने से इंजन में लोकोपायलट को केबिन में कंप्यूटर स्क्रीन पर सिगनल मिलेंगे और उसे बाहर खंभों पर लाल, पीला, हरा आदि सिगनल देखने की ज़रूरत नहीं रह जाएगी। उन्होंने कहा कि रेलवे विद्युतीकरण के लक्ष्य पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। संरक्षा के लिये ट्रैक नवीकरण का काम भी द्रुतगति से जारी है। नवंबर 2017 में 399 रूट किलोमीटर और दिसंबर में 476 किलोमीटर ट्रैक नवीकरण किया गया है जबकि अगस्त में उन्होंने 233 रूट किलोमीटर प्रतिमाह का लक्ष्य तय किया था। उन्होंने बताया कि रेलवे ने चार लाख 97 हजार टन पटरियां खरीदने का लक्ष्य तय किया है।
उन्होंने कहा कि सघन बस्तियों वाले क्षेत्रों में रेलवे लाइनों को चहारदीवारी से घेरने और अन्य स्थानों पर भी लोगों की पहुंच को सीमित करने के उपाय किए जाएंगे। इन उपायों से कोहरे जैसी समस्या से गाड़ियों के परिचालन में बाधाएं भी काफी हद तक दूर हो सकेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तरी भारत में इंजनों में लोकोपायलट को ‘फॉग सेफ’ उपकरण दिया गया है जिससे उन्हें यह पता चल जाता है कि अगला सिगनल कितनी दूर है। इसके अलावा लोकोपायलट को गाड़ी की गति को अपने विवेक से तय करने का अधिकार दिया गया है। एक सवाल के जवाब में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने बताया कि ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वॉर्निंग सिस्टम का टेंडर हो गया है और जल्द ही इसकी अापूर्ति शुरू होगी और इसे इंजनों में लगाया जाएगा। गोयल ने बताया कि सरकार ने चतुष्कोणीय विकास योजना पर काम शुरू किया है जिनमें संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर है।
दूसरी प्राथमिकता प्रौद्योगिकी है और हाईस्पीड रेल उसी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे दो तिहाई यातयात को ढोने वाले करीब 10 से 11 हज़ार किलोमीटर के छह ट्रंक मार्गों पर हाईस्पीड रेलवे शुरू करना चाहती है। इसी के साथ 2030 तक मालवहन क्षमता वर्तमान की 1.1 अरब टन सालाना से बढ़ाकर तीन अरब टन तक लाने का लक्ष्य तय किया गया है जो द्रुतगामी होगा। उन्होंने बताया कि यात्री सुविधाओं एवं सेवाओं में वह इस प्रकार का सुधार लाना चाहते हैं कि यात्रियों के बीच रेलयात्रा का पुराना आकर्षण बहाल हो सके अौर वे बिना किसी शिकायत के यात्रा का लुत्फ उठा सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.