शातिर लुटेरे निकले दिल्ली पुलिस के 2 एएसआई

गाजियाबाद। पुलिस का काम वर्दी पहनकर यूं तो सुरक्षा करना होता है, लेकिन दिल्ली पुलिस के दो एएसआई इस मूल पाठ को ही भूल गए और वह शातिर लुटेरे बन बैठे। यूपी की गाजियाबाद पुलिस ने 3 करोड़ रूपये की कीमत के गोल्ड लूट की सनसनीखेज घटना में इन दोनों लुटेरे पुलिसवालों को उनके साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से लूट का माल भी बरामद किया गया है। अपनी वर्दी व सरकारी हथियारों को उन्होंने घटनाओं को अंजाम देने का हथियार बना रखा था। वर्दी का रौब दिखाकर वह लूट व ठगी की घटनाओं को अंजाम देते थे। वर्दी को बदनाम करने वाले आरोपी पुलिसकर्मियों का नेटवर्क वेस्ट यूपी के गाजियाबाद व मेरठ सहित कई जिलों में था। नौकरी के अलावा लूट करना उनका पार्ट टाइम जॉब था। पुलिसकर्मियों के पकड़े जाने से खुद यूपी पुलिस भी हैरान है।

दरअसल लूट की एक चुनौतीपूर्ण सनसनीखेज वारदात गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में बीते 18 मार्च की रात हुई थी। मुंबई के झावेरी बाजार निवासी राकेश सांधवी की यूनियन चेन एंड ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से आभूषण बनाने की कंपनी है। कंपनी के सेल्स मैनेजर रोहित जैन अपने साथी के साथ मेरठ के ज्वैलर्स के यहां आभूषण दिखाने के लिए आए थे। जब वह कार से वापस जा रहे थे, तो साहिबाबाद इलाके में रेलवे स्टेशन कट के पास उनकी कार को ओवरटेक करके वर्दीधारी लोगों ने रोक लिया। पुलिस का रौब दिखाकर व मारपीट करके उनसे आभूषणों के बैग लूट लिए गए। लूटे गए आभूषण करीब आठ किलों थे और उनकी कीमत तीन करोड़ से ज्यादा थी। इस घटना ने पुलिस के होश उड़ा दिए। माना जा रहा था कि अपराधियों ने पुलिस की वर्दी में लूट की घटना की। मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने निर्देशन में गाजियाबाद व मेरठ की पुलिस टीमें इसकी जांच में जुट गई। कड़ी मेहनत के बाद पुलिस लुटेरों तक पहुंच गई। लुटेरे दिल्ली पुलिस के दो एएसआई निकले।

एडीजी प्रशांत कुमार ने गुरूवार को मीडिया के सामने पूरे मामले से पर्दा उठाया। पुलिस के अनुसार खाकी को बदनाम करने वाले दिल्ली पुलिस में तैनात पुलिसकर्मियों के नाम सत्येंद्र कुमार, ब्रहमपाल सिंह हैं। दोनों ही बुलंदशहर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने एक साथी दिल्ली के रहने वाले रवि कश्यप के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया था। मेरठ में आनंद ज्वैलर्स के यहां नौकरी करने वाले एक नौकर शैलेंद्र यादव आरोपी पुलिसकर्मियों के लिए मुखबिरी करता था। पुलिस ने इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया है। इनके कब्जे से लूट के 6 किलोग्राम सोने के आभूषण और चोरी की मारूति जेन कार बरामद की गई है। पुलिस के मुताबिक नौकर कई साल पहले एएसआई सतेंद्र के संपर्क में आया, तो उसने लालच देकर उसे मुखबिरी करने के लिए तैयार कर लिया। इसके बाद शैलेंद्र मुखबिरी करने लगा। कोई बाहर का ज्वैलर्स आभूषणों के साथ जैसे ही मेरठ से निकलता था शैलेंद्र सतेंद्र में ब्रहमपाल को इसकी सूचना दे देता था। इस तरह से आरोपी बीते दस सालों में कई वारदातों को अंजाम दे चुके थे, लेकिन कभी पकड़े नहीं गए। एडीजी ने सिरदर्द बनी घटना का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को पचास हजार रूपये का इनाम देने की घोषणा की है। प्रेस वार्ता में आईजी रामकुमार, एसएसपी वैभव कृष्ण, एसपी (सिटी) आकाश तोमर व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
पुलिस के अनुसार दोनों पुलिसवाले लूट की घटनाओं को ज्यादातर बॉर्डर पर अंजाम देते थे। इसका उन्हें सबसे बड़ा फायदा यह होता था कि घटना के तुरंत बाद वह दिल्ली में एंट्री कर जाते थे। ऐसा वह चेकिंग से बचने के लिए करते थे। वह गाजियाबाद के भीड़भाड़ वाले इलाके में घटना करने से बचते थे, क्योंकि चेकिंग में पकड़े जाने का डर भी होता था। उनकी कोशिश होती थी कि बॉर्डर पर लूट की जाए, ताकि भागने का समय रहे। यदि कहीं चेकिंग में उन्हें रोका भी जाता था, तो चूंकि वह वर्दी में होते थे इसलिए आराम से निकल जाते थे। उन पर कोई शक नहीं करता था। लूट की घटना में वह चोरी के वाहन का इस्तेमाल करते थे। माना जा रहा है कि लूट के माल से उन्होंने अपनी करोड़ों की संपत्ति भी बना ली। पुलिस इसकी जाँच करेगी।

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