न्यायालय ने 358 खदानों के पट्टे रद्द करने के लिये याचिका पर केन्द्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने देश में 358 से अधिक लौह अयस्क खदानों के आबंटन और पट्टे निरस्त करने के लिये दायर याचिका पर जवाब देने के लिये बृहस्पतिवार को केन्द्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन खदानों का नये सिरे से आकलन कराये बगैर ही इनमें खनन के लिये फर्मो के पट्टे की अवधि बढ़ाई गयी है या नये आबंटन किये गये हैं।

न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ से केन्द्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने जवाब दाखिल करने के लिये कुछ समय देने का अनुरोध किया। पीठ ने केन्द्र को चार सप्ताह का समय देते हुये कहा कि इस मामले पर विस्तार से सुनवाई की आवश्यकता है। यह याचिका अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है। शर्मा ने दलील दी कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किये बगैर ही इन खदानों के पट्टों की अवधि बढ़ाई गयी है या इन्हें पट्टे दिये गये हैं।

केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल ने दलील दी कि दुर्भावना के साथ यह याचिका दायर की गयी है और वह इस पर जवाब के लिये समय चाहिए। शीर्ष अदालत ने 16 अप्रैल को केन्द्र से कहा था कि वह शर्मा की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे। इस याचिका में शर्मा ने सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस नरसिम्हा को न्याय मित्र नियुक्त किया है जो न्यायालय की मदद करेंगे।

शर्मा ने याचिका में आरोप लगाया है कि इस साल फरवरी में उन्हे जानकारी मिली कि राजनीतिक दलों को ‘‘चंदे में बड़ी रकम’’ देने पर 288 खदानों के पट्टे की अवधि बढ़ा दी गयी है। याचिका के अनुसार इससे सरकारी खजाने को चार लाख करोड़ रूपए का वित्तीय नुकसान हुआ है। याचिका में दावा किया गया है कि नीलामी प्रक्रिया या नये सिरे से आकलन प्रक्रिया के पालन के बगैर ही 358 से ज्यादा लौह अयस्क खदानों में खनन के लिये फर्मो के पट्टे की अवधि बढ़ा दी गयी है या उन्हें पट्टे दिये गये हैं। याचिका में खदानों से निकाले गये खनिज के बाजार मूल्य की वसूली का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस प्रकरण की न्यायालय की निगरानी में जांच करायी जाये।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.