नई दिल्ली। राफेल विमान सौदा मामले में याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने आज कहा कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला ‘पूरी तरह गलत’ है। उन्होंने कहा कि फैसला लोगों के हित के विरुद्ध है और वे मामले में लगातार अभियान चलाते रहेंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने लड़ाकू विमान सौदे मामले में अदालत की निगरानी में जांच करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है कि ‘इस तरह का गलत फैसला’ सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से आया है। यह फैसला तब दिया गया है जब सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि दसॉ ने अनिल अंबानी की कंपनी को कांट्रेक्ट दिया, जबकि रक्षा खरीद प्रक्रिया और रक्षा ऑफसेट दिशा-निर्देशों में वर्णित है कि बिना रक्षा मंत्री की स्वीकृति के ऑफसेट कांट्रेक्ट को किसी को नहीं दिया जा सकता।

भूषण ने अदालत के बाहर पत्रकारों से कहा, “मेरे विचार में फैसला पूरी तरह गलत है। हमने जांच की मांग की थी। अगर कोई आरोप लगाता है कि सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है और सबूत मुहैया कराता है तो निश्चित ही जांच होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से यह सौदा 8.2 अरब यूरो में करने से देश को 20,000 करोड़ रुपये की हानि हुई है, जबकि भारतीय वायु सेना के विशेषज्ञों ने इसके लिए 5.2 अरब यूरो के मूल्य तय किए थे। उन्होंने कहा कि अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि मामले में उसकी न्यायिक समीक्षा का अधिकार सीमित है। भूषण ने कहा, “यह सरकार को सीमित क्लीन चिट है और सौदे के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा। पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर फैसला बाद में लिया जाएगा।”