नयी दिल्ली। भगवान राम से स्वयं की तुलना करने वाली बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ धार्मिक भावनायें आहत करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पुलिस को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली की एक अदालत एक मई को सुनवाई करेगी । इस याचिका में मायावती की ओर से उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे का जिक्र किया गया है जिसमें बसपा नेता ने कहा है कि अगर उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ दल (भाजपा) सरकारी धन का इस्तेमाल कर अयोध्या में भगवान राम की 221 मीटर ऊंची प्रतिमा बनवा सकता है तो वह अपनी मूर्ति क्यों नहीं बनवा सकती हैं ।

इसमें कहा गया है कि मायावती ने अपने हलफनामे में‘‘व्यंग्यात्मक टिप्पणी’’ कर दो धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्य अथवा दुश्मनी की भावना भड़काने का प्रयास किया है । निचली अदालत में दायर इस याचिका में दिल्ली पुलिस को मायावती के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए तथा 295 ए तथा अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिये जाने की मांग की गयी है । याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसने बसपा नेता के खिलाफ नांगलोई पुलिस थाने में लिखित में शिकायत दी थी लेकिन इस पर अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है । इसमें दावा किया गया है कि नेता ने जानबूझ कर और गलत मंशा से हिंदुओं की धार्मिक भावनायें भड़काने के लिए अपनी तुलना भगवान राम से की थी।