अंसल बिल्डर्स और आईसीआईसीआई बैंक की मिलीभगत से हुई एनआरआई के साथ हुई ठगी!

 

के पी मलिक

नई दिल्ली: अमरदीप सिंह का कहना हैं कि पैसे सब दे दिए लेकिन आज 7 साल बाद भी मकान का कब्ज़ा नहीं मिला , अंसल बिल्डर ने किसी और की जमीन पर मकान बना दिया। कहते हैं जब आदमी एक बार कोर्ट कचहरी जेल वगैरह के चक्कर लगा लेता है तब उसके अंदर का भय ख़त्म हो जाता है, कुछ यही कहावत अंसल बिल्डर्स समूह के मालिकों पर सटीक बैठती है।उपहार सिनेमा कांड के बाद इनके अंदर से कानून का भय जाता रहा और अब ये समूह बेख़ौफ़ हो के ठगी धोखाधड़ी बिल्डिंग फ्लैट का झांसा दे कर कर रहा है — बिल्कुल यही कहना है एक एनआरआई पीड़ित का जिसने अंसल समूह के झांसे में आ कर अपना डेढ़ करोड़ गंवा बैठा।
पीड़ित अमरदीप के भाई जसप्रीत जो एनआरआई है फ़िलहाल यूएसए में काम करते है , उस वक़्त दुबई रह रहे थे , जसप्रीत ने दुबई में हुए प्रॉपर्टी एक्सपो {सन -2007 } के दौरान अंसल बिल्डर्स के गुडगाँव स्थित सुशांत लोक -3 में एक विला {कोठी } स्कीम का पता चला , योजना जसप्रीत और उनके परिवार को पसंद आई। जसप्रीत ने तय पेमेंट टर्म्स के अनुसार अंसल बिल्डर्स को भुगतान किया , कुल सौदे में करीब 1 करोड़ का होम लोन अंसल समूह ने जसप्रीत को आईसीआईसीआई बैंक के जरिये दिलवाया।
अंसल बिल्डर्स ने कोठी बना कर तैयार कर दी , पीड़ित को बिना कब्ज़ा दिलाये उसकी रजिस्ट्री सेल डीड वगैरह भी पंजीकृत करवा दी।
पीड़ित एनआरआई जसप्रीत ने जो भी पैसे देने थे वो अंसल बिल्डर्स को पूरा भुगतान कर दिया। {सन -2010 तक } लेकिन आज दिनांक तक भी पीड़ित को वह कोठी का कब्ज़ा नहीं दिया गया है। और कोठी का कब्ज़ा मिले भी तो कैसे !!!! जिस जमीन पर कोठी बनी है वह जमीन अंसल की है ही नहीं। ग्राम वजीराबाद के एक किसान ओमप्रकाश की जमीन को अंसल बिल्डर्स ने खरीदने का इक़रार किया ,और उस इक़रार के आधार पर उन्होंने उक्त जमीन पर कोठी बना दी ,लेकिन इक़रार के मुताबिक किसान को जमीन के पैसे नहीं दिए , मजबूरन किसान ने गुड़गांव सिविल कोर्ट से अपना दावा लगा कर वो जमीन अंसल से वापिस ले ली और उस भूमि के चारों तरफ बॉउंड्री बना दी –अब पीड़ित की कोठी उसी बॉउंड्री के अंदर है –वो उस कोठी में आना -जाना कैसे करे -लिहाजा पीड़ित को उस खरीदी गई प्रॉपर्टी का कब्ज़ा मिला नहीं लेकिन उसको डेढ़ करोड़ की चपत लग गई और वो पिछले 7 सालों से बैंक की किश्त करीब एक लाख रुपया महीना चुकाने को मजबूर है। आज भी बैंक का 55 लाख ऋण बाकी चल रहा है।
आईसीआईसीआई बैंक और अंसल बिल्डर्स की मिलीभगत — यह जानते हुए भी कि जिस जमीन पर कोठी बनेगी ,उस जमीन का प्रॉपर लीगल टाइटल नहीं है अंसल बिल्डर्स के पास ,बैंक के कुछ कर्मचारियों को अंसल बिल्डर्स ने कुछ ले -दे कर प्रॉपर्टी की लीगल टाइटल को वेरीफाई करवाया और पीड़ित को ऋण मंजूर करवाया। वहीँ हरियाणा टाउन प्लानिंग की रिपोर्ट में बताया गया है की अंसल बिल्डर्स ने फर्जी कागज लगा कर ओमप्रकाश की जमीन को अपना दिखाया हुआ है और नक़्शे पास करवा लिए है। नतीजा बैंक ने एक करोड़ का भुगतान सीधे अंसल बिल्डर्स को कर दिया ,और पीड़ित आज दिन तक मजबूर है किश्त चुकाने को , वह यदि डिफ़ॉल्ट करता है तो उसका सिबिल रिकॉर्ड ख़राब होगा। पीड़ित ने उक्त ठगी के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता परिवाद मंच में दावा सन 2011 में अंसल बिल्डर्स के खिलाफ किया हुआ है जिसका फैसला 8 फरवरी को आएगा और साथ ही एक आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी का मुकदमा भी अंसल बिल्डर्स के मालिकों के खिलाफ गुड़गांव कोर्ट में लगाया हुआ है , जिसमे आगामी 17 जनवरी को मजिस्ट्रेट ने दफा आईपीसी 420 & 120 बी अंसल बिल्डर्स के तमाम मालिकों को सम्मन भेजा है कोर्ट में उपस्थित होने के लिए।
पीड़ित अपनी क़ानूनी लड़ाई अपने तरीके और खर्चे पर लड़ ही रहा है ,लेकिन पीड़ित की यह मंशा है कि देश के अन्य ख़ास -आम लोगों तक अंसल बिल्डर्स की कारगुजारी का खुलासा हो ,ताकि वहां आने वाले नए ग्राहक पहले से सावचेत रहे ,प्रॉपर्टी की टाइटल जमीन इत्यादि की एक बार जांच पड़ताल कर ले ताकि भविष्य की किसी धोखाधड़ी से बच जाएं। और यह सन्देश देना भी कि आईसीआईसीआई बैंक अपने स्तर पर पुनः जाँच करे और खुद देखे कि कैसे मिलीभगत से अंसल बिल्डर्स ने उस प्रॉपर्टी का लीगल टाइटल वेरीफाई करवाया है।
पीड़ित बैंक से यह सवाल पूछना चाहता है — 1 इस धोखाधड़ी के केस में क्यों न अंसल बिल्डर्स के साथ बैंक को भी भागीदार बनाया जाए. 2 बैंक अपने स्तर पर क्या सच जानने -समझने का प्रयास करेगा. 3 . पीड़ित यदि बैंक की किश्त नहीं भरता आगे से , ऐसे में बैंक उस प्रॉपर्टी को कैसे किसको नीलाम कर अपनी बकाया वसूलेगा. 4 क्या बैंक खुद को पाक साफ़ साबित करने के लिए अंसल बिल्डर्स और अपने तात्कालिक कर्मचारियों पर कोई लीगल एक्शन लेगा.

 

 

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