कहीं स्याही, कहीं जूता , कहीं थप्पड़

 

कमलेश भारतीय

हिसार। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हिसार में थे। अपने रोड शो के क्रम में । देवी भवन के द्वार पर जैसे ही श्रीगणेश किया, पहले से ही भीड में खडे एक युवक ने उन पर कब काला तेल यानी मोबाइल ऑयल फेंक दिया , सुरक्षाकर्मियों को भी पता नहीं चल पाया । जहां तक कि पुलिस अधीक्षक मनीषा चौधरी और उपायुक्त अशोक कुमार मीणा भी हल्के बक्के रह गये । युवक को मौके पर दबोच लिया गया और उसकी पहचान प्रवीण जाखोद खेडा के रूप में हुई है । उसने चौ देवीलाल के नारे लगाए लेकिन इनेलो ने कुलदीप बिश्नोई के साथ तुरंत फोटो वायरल कर उसे अपना कार्यकर्ता मानने से इंकार कर दिया । दूसरी ओर प्रवक्ता का कहना है कि फोटो खिंचवाने से कोई किसी नेता का कार्यकर्ता साबित नहीं हो जाता । खैर । इस बहस मे क्या रखा है ? मुख्यमंत्री ने भवन के अंदर ही कपडे बदल लिए और रोड शो शुरू किया । तब उन्हें कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए ।
सवाल यह है कि जिस खादी कोई बडे सम्मान से देखा जाता था और लोग फूल बरसाते थे । अब उसी खादी को इतना बुरा क्यों समझा जाता है ? खादी से मतलब नेताओं का पहनावा । बताइए कभी स्याही, कभी जूता , कभी चप्पल, कभी थप्पड़ तो अब मोबाइल ऑयल क्यों फेंका जा रहा है ? क्या आम आदमी के दिल में नेताओं की लोकप्रियता के गिरने का इसे पैमाना माना जा सकता है ? दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल संभवतः इस मामले में पहले नम्बर पर हो सकते हैं । जब जब मीडिया से रूबरू हुए तब तब कोई न कोई उन पर स्याही या जूता फेंकने चला आया । कहां तो वे राजनीति की हवा बदलने निकले थे और कहां लोग उन्हें बदलने के लिए मजबूर कर रहे हैं । स्याही फेंकना या ऐसा कुछ भी अभद्र करना यही संकेत देता है कि सब ठीक नहीं है । लोकप्रियता गिर रही है । समय रहते संभलिए, जनता क्या कह रही है । प्राचीन काल से ही राजा जनता के बीच जाते रहे हैं लेकिन वे रात्रि के समय भेष बदल कर भी जाते थे और तब उन्हें जनता के दुख दर्द का सही पता चलता था। अब नेता सिर्फ दिन में अपना शो करते हैं और रात को अंधेरी गलियों में दुख सुनने नहीं निकलते , जिस कारण जनता ऐसे तरीके अपनाती हैंं : ध्यानाकर्षित करने के लिए । कृपया जनता के दुख दर्द समझिए । रोड शो सिर्फ शो हैं ।

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