भाजपा का दांव और कांग्रेस को मिली मात

बेंगलुरू। भाजपा कर्नाटक में सरकार बनाती दिख रही है. जनता दल सेक्युलर ने अपना प्रदर्शन तो सुधारा लेकिन लगता नहीं कि भाजपा को वह अपने दम पर सरकार बनाने से रोक पाएगी. कांग्रेस एक बार फिर से राहुल गांधी के तमाम प्रयासों के बावजूद अपनी सत्ता नहीं बचा पाई. गुजरात के बाद उसे यहां बड़ी उम्मीद थी, लेकिन गुजरात के बाद कर्नाटक में भी उसे निराशा ही मिली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्तारूढ़ कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही है। भाजपा की बढ़त से खुश भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को राज्य में जश्न मनाया। भाजपा के झंडे लहराते हुए और ढोल की थाप पर थिरकते पार्टी के कार्यकर्ताओं और कुछ नेताओं ने मल्लेश्वरम में पार्टी कार्यालय में जश्न मनाया। कई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के समर्थन में नारेबाजी की। गौरतलब है कि शनिवार को हुए विधानसभा चुनाव की मंगलवार को हो रही मतगणना में भाजपा 222 सीटों में से 104 पर आगे चल रही है। राज्य की 224 में से 222 सीटों पर ही चुनाव हुए थे।
तमाम चुनावों की तरह इन चुनावों में भी भाजपा के सबसे बड़े पोस्टर ब्वॉय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहे. उन्होंने यहां कुल 21 रैलियां की. ये प्रधानमंत्री मोदी के आक्रामक चुनाव प्रचार का ही नतीजा रहा कि कर्नाटक के 6 में से 5 क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त मिली. यहां तक मैसुरु के क्षेत्र में भी कमजोर रहने वाली भाजपा ने इस बार कांग्रेस के बराबर सीटें हासिल की. मोदी ने पहले ही कह दिया था कि इस चुनाव के बाद कांग्रेस 3 पी में बदल जाएगी.
कर्नाटक चुनाव में एक बार फिर से दिखा दिया कि इस समय देश में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जैसा चुनाव मैनेजमेंट करने वाला कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है. सिद्धारमैया के खिलाफ पिछले पांच साल में ऐसी कोई लहर नहीं थी, जिसे बड़ा मुद्दा बनाया जा सके. लेकिन प्रधानमंत्री के साथ साथ अमित शाह ने उन पर आक्रामक हमले किए. और उन्हें कमीशन वाला मुख्यमंत्री बताया. इतना ही नहीं अमित शाह कर्नाटक के लोगों को लिंगायत के मुद्दे पर अपनी बात पहुंचाने में कामयाब रहे. पन्ना प्रमुख का उनका फॉर्मूला भी यहां कारगर रहा.

 

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