मां के लिए उपलब्ध हो बेहतर सुविधा: करीना कपूर

नई दिल्ली। यूनिसेफ भारत ने मांओं व नवजातों के उत्सव को मनाने के महत्व पर प्र्रकाश डालने के लिए आज एक पैनल चर्चा का आयोजन किया। ओडिसा से एक डाक्टर,उत्तर प्रदेश से एक फ्रंटलाइन आशा वर्कर,पश्चिम बंगाल से एक पिता,यूनिसेफ उप प्रतिनिधि,हेनरिट एहरेंस,यूनिसेफ कार्यवाहक स्वास्थ्य प्रमुख,डा. गगन गुप्ता और यूनिसेफ सेलेब्रिटी एडवोकेट करीना कपूर ने एक घ्ंाटे तक सभी मांओं व उनके नवजातों को स्पोर्ट करने की जरूरत पर ताकि वे जीवित और समृद्व रहें , परिचर्चा की। यह कार्यक्रम यूनिसेफ की वैश्विक ‘ प्रत्येक बच्चा जीवित रहे ’ मुहिम के पृष्टपट में मातृ दिवस को मनाने के लिया आयोजित किया गया था।
दुनियाभर में यूनिसेफ का ध्यान प्रत्येक बच्चा जीवित रहे, अभियान पर केंद्रित है, नवजातों को बचाने वाला यह अभियान नवजातों की रोकने योग्य मौतों के खात्मे को 2030 तक हासिल करने के लिए यूनिसेफ के प्रयासों को स्पोर्ट करता है व गति प्रदान करता है,इसमें बच्चियों पर भी फोकस है। दुनियाभर में 5 साल से कम आयु के बच्चों की होने वाली मौेतों में करीब 1/5 भारत में होती हैं और दुनिया की लगभग एक चैथाई नवजात मौतें भारत में होती हैं, यह अभियान इस मुददे के ईद गिर्द गहराई पर चिंतन का माहौल बनानेे के लिए केंद्रित है।
डा. गगन गुप्ता ने इस अवसर पर कहा, ‘भारत ने बाल मृत्यु में कमी लाने की दिशा में अच्छी व समनुरूप प्रगति की है, 2015 की तुलना में 2016 में पांच साल से कम आयु के करीब 120,000 कम बच्चे मरे। यद्यपि नवजात मौंतो को कम करने व बाल जीवन में लैंगिक फासले को संबोधित करने के लिए अधिक प्रयासों की जरूरत है। यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक बच्चे को जिंदगी के पहले घंटे में मां का दूध मिले, सरीखा साधारण हस्तक्षेप नवजात मौतों में 22 प्रतिशत तक की कमी ला सकता है। सरकार अपना काम कर रही है लेकिन हरेक बच्चे की जिंदगी की शुरूआत उत्तम हो और कोई पीछे नहीं छूटे, यह सुनिश्चित करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेवारी है। उन्होंने यह भी कहा- मैं भारत सरकार को यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज के प्रति किए गए प्रयासों और निवेश, जो कि ‘ आयुष्मान भारत ’के तहत साफ झलकते हैं, के लिए बधाई देता हूं। मैं निपुण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के दल को , जो कि सुरक्षित हाथों से हरेक मां व शिशु को स्पोर्ट करने के प्रति समर्पित हैं, को सलाम करता हूं।
ओडिसा के मालकनगिरी के डा. होता ने नजदीकी प्राइमरी स्वास्थ्य देखभाल केंद्र तक पैदल पहुंचने वाली कठिन यात्रा और एक आदिवासी मां व उसके नवजात को बचाने वाले अपने अनुभव साझा किए। उत्तर प्रदेश की उमा देवी नामक आशा वर्कर ने बताया कि कैसे उसने एक मां और उसके परिवार को अपने नवजात को करीब के स्पेशल न्यूबार्न केयर यूनिट में ले जाने के लिए राजी कर लिया। पश्चिम बंगाल से आए एक पिता ने अपने नवजात जुड़वा को कंगारू देखभाल मुहैया कराने और पत्नी को स्पोर्ट करने वाले,ताकि वह अपने बच्चों को स्तनपान करा सके,संबंधी अनुभव साझा किए।
करीना कपूर खान ने बताया, ‘ जब मैं गर्भवती थी, गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य देखभाल और अच्छे डाक्टर व नर्सें उपलब्ध थीं। लेकिन यह विशेष सुविधा सिर्फ कुछेक के लिए ही नहीं होनी चाहिए। गुणात्मक स्वास्थ्य देखभाल ऐसी चीज है जिसे हरेक मां व हरेक बच्चे को, बालिका या बालक, चाहे वे कहीं भी रहते हों तक पहुंचाने के लिए सुनिश्चित करने की जरूरत है। गर्भावस्था व नवजात के जन्म वाली अवधि के दौरान सुरक्षित हाथों द्वारा स्पोर्ट हासिल करना हरेक मां व हरेक शिशु का अधिकार है।’ करीना कपूर ने लैंगिक निष्पक्षता व गुणवत्ता की जरूरत पर भी रोशनी डाली। हमें अपनी लड़कियों की ऐसी ही देखभाल करने की जरूरत है,जैसे कि हम लड़कों की करते हैं। यह बहुत ही खिन्न करने वाली बात है कि बालिकाओं की हमेशा वैसी देखभाल नहीं की जाती जैसी कि बालकों की।’ उसने यह भी कहा कि यदि आपकी बच्ची बीमार हो जाए, तो उसकी ऐसे ही फौरन मदद करो जैसे कि आप लड़के के लिए करोगो।
बता दें कि कपूर यूनिसेफ के साथ पांच सालों से भी अधिक समय से जुड़ी हुई है और बाल अधिकारों के ईद गिर्द विमर्श को स्पोर्ट कर रही है,विशेष तौर पर शिक्षा के संदर्भ में और हाल ही में नवजात स्वास्थ्य,पोषण और विकास संबंधी विमर्श को। विचार-विमर्श का निष्कर्ष यह निकला कि सभी साझेदारों को नवजातों की जिंदगी बावत संदेशों व सुविधाओं को बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रयासों की जरूरत है। इसमें हर मां व नवजात के लिए किफायती और गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य देखभाल , स्वास्थ्य सुविधाओं पर स्वच्छ पानी, बिजली की 24ग7 पूत्र्ति , जन्म के दौरान निपुण स्वास्थ्य अटेंडट की उपस्थिति,नाल को विसंक्रामित करना और मां व बच्चे की त्वचा के बीच संपर्क शामिल हैं।

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