चीन और पाक से लगती सीमा पर स्थिति सेना के नियंत्रण में: विपिन रावत

नई दिल्ली।  सेना अध्यक्ष जनरल विपिन रावत ने कहा कि चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर सेना की पकड़ मजबूत बनी हुई है। इस संबंध में कोई चिंता करने का विषय नहीं है। दिल्ली में अपनी सालाना प्रेस वार्ता में विपिन रावत ने कहा कि देश की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर परिस्थितियां पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। उन्होंने आगे कहा कि जम्मू कश्मीर में स्थिति को अधिक बेहतर करने की आवश्यकता है। सेना जम्मू कश्मीर में शांति स्थापित करने के प्रयास कर रही है। वहां की स्थिति को अधिक नियंत्रण में लाने की आवश्यकता है। इसके लिए ‘हार्ड पॉवर’ और ‘सॉफ्ट पॉवर’ दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सेना अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू कश्मीर दो देशों के बीच का एक मुद्दा है। इस पर किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। हम अपने नियम व शर्तों पर बातचीत करेंगे। हुर्रियत से बातचीत पर रावत ने कहा कि सेना की इस संबंध में स्थिति पहले से ही स्पष्ट है। रावत ने कहा कि एक सामान्य नागरिक और एक आतंकवादी में अंतर करना आसान नहीं होता। सेना कभी भी किसी नागरिक को जानबूझकर निशाना नहीं बनाती। सीमा पार से आने वाला कौन आतंकवादी गतिविधि में लगा हुआ सेना इस बारे में नहीं जानती।

अमेरिका और रूस के अफगानिस्तान में तालिबान से बातचीत किए जाने को लेकर रावत ने कहा कि अफगानिस्तान से हमारे कुछ हित जुड़े हुए हैं और वहां की स्थिति को लेकर तटस्थता नहीं रख सकते। हालांकि जम्मू कश्मीर को लेकर यही दृष्टिकोण लागू नहीं होता। सेनाध्यक्ष ने कहा कि विकलांगता का शिकार होने वाले जवानों के लिए सेना योजना बना रही। गंभीर रूप से विकलांग जवानों और उनके परिजनों का एक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा, उन तरीकों की तलाश की जा रही है जिनसे उनकी सहायता की जा सकती है।

सेनाध्यक्ष ने कहा कि फरवरी और मार्च में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन(डीआरडीओ) सेना को मिसाइल और रॉकेट मुहैया कराने की अंतिम समय सीमा दी है। अगर ऐसा नहीं होता तो हम विदेशों से हथियार आयात करेंगे। समलैंगिकों के विषय पर सेनाध्यक्ष ने कहा कि इस पर सेना बंद ख्यालों वाली सोच रखती है। सेना समलैंगिक गतिविधियों को अनुमति नहीं देगी। उन्होंने कहा कि सेना के अपने कानून होते हैं। उनसे उच्चतम न्यायालय के समलैंगिक संबंधों को लेकर आए फैसले पर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा कि सेना में ‘एडल्ट्री’ हमेशा से एक अपराध माना गया है। सेना एलजीबीटी गतिविधियों की अनुमति नहीं देगी। इससे निपटने के लिए हमारे पास सेना में कुछ सेक्शन हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.