नई दिल्ली।  राफेल विमान सौदे को लेकर कांग्रेस पार्टी ने नए आरोप लगाए हैं। पार्टी ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और रिलायंस कंपनी को निशाना बनाया है और नए खुलासे किए हैं। कांग्रेस ने कहा है कि फ्रांस में राफेल सौदे की घोषणा होने के बाद केंद्र सरकार ने रिलायंस एयरोस्ट्रक्टर को लाइसेंस दिया। कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने नया खुलासा करते हुए कहा कि इस सौदे की घोषणा होने के बाद रिलायंस एयरोस्ट्रक्टर लिमिटेड कंपनी को तब की वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने लाइसेंस दिया था।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से कहा कि यह सब जानते हैं कि रिलायंस डिफेंस कंपनी राफेल सौदे से 12 दिन पहले बनी थी लेकिन दिलचस्प तथ्य यह है कि रिलायंस एयरोस्ट्रक्टर लिमिटेड कंपनी 24 अप्रैल 2015 को बनी यानी दस अप्रैल 2015 को राफेल सौदे की घोषणा के बाद तब की वाणिज्य निर्मला सीतारमण ने उस कंपनी को लाइसेंस दिया था।

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह सवाल उठाया कि इसके पीछे वाणिज्य मंत्रालय किसके व्यापारिक हितों की रक्षा कर रहा था? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चार जनवरी को संसद में अपने भाषण में रक्षा मंत्री सीतारमण ने कहा था कि वे राफेल सौदे की ऑफसेट पार्टनर के बारे में जानकारी नहीं दे सकती हैं जबकि हकीकत यह है कि 28 अक्टूबर 2017 को फ्रांस के रक्षा मंत्री ने सीतारमण से मुलाकात की थी और दोनों दासो रिलायंस के साझा उपक्रम की आधारशिला रखने के लिए नागपुर गए थे। उनके साथ मंत्रिमंडल के सहयोगी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी थे।

प्रियंका चतुर्वेदी ने यह सवाल उठाया कि सीतारमण ने आखिर संसद के सामने यह झूठ क्यों बोला और उन्होंने किस कारपोर्ट संस्था के हितों की रक्षा के लिए ऐसा किया? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सीतारमण ने पिछले साल 14 सितंबर को यह दावा किया था कि एचएएल के पास 108 विमान बनाने की क्षमता नहीं है, आखिर ऐसा कह कर वे किस कारपोरेट के हितों का बचाव कर रही थीं? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब एचएएल के साथ 13 मार्च 2014 को 36 हजार करोड़ का वर्कशेयर समझौता हो चुका था तो एचएएल से राफेल का ठेका क्यों छीन लिया गया?