नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के अंदर मुश्किलों में खड़ा रहने या एकजुट होने की ज्यादा शक्ति होती है। अगर उन्हें उचित सामाजिक भागीदारी मिले तो देश का कायाकल्प हो जाए। वे यहां ‘राजनीति की पाठशाला’ संस्था द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में ‘राजनीति में महिलाओं का योगदान एवं चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी गलती है कि हम उन्हें आगे नहीं बढ़ाते। उन्होंने इस बारे में कांग्रेस समेत अन्य दलों की खामियां निकालीं और कहा कि महिलाएं आज 33 प्रतिशत से भी ज्यादा की हकदार हैं। सिब्बल ने कहा कि महिलाएं पुरूषों से ज्यादा जिम्मेदार होती हैं। समाज में उनके योगदान को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैसे तो हर क्षेत्र में उन्होंने अपना परचम लहराया है पर एक शिक्षक के तौर पर ही देखें तो वे काफी सफल हैं, क्योकि बच्चों के बीच में वह एक मां के रूप में बेहतर समझ रखती हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव रोहित चैधरी ने कहा कि महिलाओं के लिए राजनीति ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है। वैसे तो हमारे देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष या कई मंत्री पदों पर महिलाएं आसीन रही हैं लेकिन उनके लिए आज भी राजनीति की डगर बेहद कठिन है। कहीं न कहीं इसके लिए हमारा समाज ही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर हमें नजरिया बदलने की जरूरत है। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष अजय पांडेय और संजीव त्यागी ने भी अपने-अपने विचार रखे और विभिन्न प्रदेशों से अलग-अलग संस्थाओं और दलों से आईं महिलाओं को सम्मानित किया। महिला वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी को लेकर विस्तार से चर्चा की और 33 प्रतिशत की जगह आरक्षण की सीमा बढ़ाए जाने पर बल दिया। आयोजन को सफल बनाने में सायकोरियन मैट्रोमोनियल की रश्मि कपूर, संजीव त्यागी और डाॅ सुनीति वाधवा का विशेष का सहयोग रहा।